Search

सेमिनार में शायरों ने विखेरा जलवा

अमेठी।(आरएनएस ) राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद, नई दिल्ली के सौजन्य से ओमकार सेवा संस्थान द्वारा जगदीशपुर विकास खण्ड के अन्तर्गत ग्राम पंचायत पूरे गौहर, मजरे गड़रिया डीह में चकबस्त और उनकी शायरी विषय पर एक रोजा सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए डा0 मोईनुद्दीन खान (कुलपति) सिंघानिया विश्वविद्यालय, राजस्थान ने कहा कि उर्दू…

READ MORE

तुम चाँद हो रोशन …हम तो टूटे सितारे है…….

नींद अब भी तुम्हारी है ….ख्वाब अब भी तुम्हारे है अब भी आँखे है बिन ब्याही, आंसू अब भी कुंवारे है ये बारिश तुम से खुशबु की ..तुम्ही से रंग छाए है ये ख्वाहिश तुमने महकाई ,,तुमने अरमां निखारे है टूटता बन के साहिल में मौज बन तोडती तुम दम  तुम हो मजबूर लहरों सी हम भी बेबस किनारे है…

READ MORE

बचपन की यादें!

ज़रदार यूं तो हो गया वो फ़न ख़रीदकर लेकिन कभी न ला सका बचपन ख़रीदकर हर सू तलाश कर लिया मिलता नही कहीं ऐ मां कहीं से ला दे लड़कपन ख़रीदकर चेहरे के दाग, दाग ही दिखते रहे सदा देखे हैं हमने भी कई दर्पन खरीदकर आसानियां बहुत थी तो जीना मुहाल था जीने में लुत्फ़ आ गया उलझन ख़रीदकर…

READ MORE

बकरे की बलि की जगह रक्तदान करके आते हैं!

चलो कुछ इस अंदाज में अपनी ये ईद मनाते हैं, बकरे की बलि की जगह रक्तदान करके आते हैं। बलि भी हो जाएगी और ये बकरे भी बच जाएंगे, चलो मिलकर हम एक नई रीत इस बार चलाते हैं। दुआ मिलेगी जब किसी की जिंदगी बचाएगा रक्त, इस ईद पर एक फर्ज इंसानियत का भी निभाते हैं। किसी के लबों…

READ MORE

इंसान की आदत

इंसान की आदत बदलती नहीं लोग अपनी भूख-प्यास भूल जाते हैं ,काम केआगे एक तुम हो खाकर भी कहते हो ,भूख है मिटती नहीं दौड़ो और दौड़ो,मगर तुम्हारी चाल बदलती नहीं आगे आने के फारमूले शायद तुम्हें पता ही नहीं चाहे तो सीख लो हमसे, मगर तुम्हारी खुदगर्जी में भी कोई अदा नहीं शर्मशार होता है तुम्हें देख जमीर मेरा…

READ MORE

गीत- हमसफर वो याद आया !

जिंदगी की राह में ये मन अकेला तिलमिलाया हमसफर वो याद आया ! प्रीत के इस गाँव में था दूरियों का बोलबाला बुझ गया था आँधियों से दीप मेरा प्रेमवाला आज लगता है किसी ने दीप वो फिर से जलाया हमसफर वो याद आया ! जेठ की अब इस तपन में पांव देखो जल रहें हैं हाथ पर यूँ धूप…

READ MORE

ये वक्त भी बड़ा अजीब हैं।

ये वक्त भी बड़ा अजीब हैं। उसकी दो रोटी के लिए, वो ही बच्चे आज आपस मे लड़ते हैं , जिसके….लिए…… बचपन मे लड़ते थे , ओर कहते थे कि…… माँ तो सिर्फ मेरी हैं। वही बेटे आज कहते हैं, भाई माँ को रखने की बारी आज तेरी हैं। ….2… बता एे जिन्दगी कहाँ सिखाये जाते हैं … ढकना चेहरा…

READ MORE